माँ के आँचल से निकली सेवा की धारा...
हर जरूरतमंद को मिले जीवन का सहारा।

  • चंद्रकला फाउण्डेशन’ एक ऐसा सफर जो बस चुन लिया गया, किन्तु पता नहीं था तय कर भी पाऊंगी या नहीं । एक दिन मेरी एक मित्र की लडकियों के  शादी थी उस आंगन में मै भी थी। वहां चर्चा हो रही थी मां और बेटी के प्यारा सा बिताए हुए समय पर चर्चा हो रही थी, हम ने एक ऐसी बात सुनी और कह दी कि ऐसा भी होता है किया तो उसने किसी बात पर कहा तुम्हें क्या पता, तुम्हारे पास मां नहीं है । मैंने उससे कहा, मां नहीं है तो क्या हुआ, मैं तो किसी की लड़की हूँ, अपमान, उपेक्षा, उपहास और इनसबसे होने वाली पीड़ा मैंने सही है । हमारे समाज में मां के साथ जो दोयम दर्जे का व्यवहार होता है उससे वाकिफ हूँ। ‘ इतना मैंने कह तोदिया और वो समझ भी गई, किन्तु उसके द्वारा किए गए प्रश्न ने “‘कि तम्हेंक्या पता तुम्हारे पास मां नहीं है”‘ मेरी नींद उड़ा दी, मैं कई दिनों तक व्याकुल रही, मैंने ये बात अपनी और मित्रों से शेयर की । तभी एक मित्र ने कहा तुम मां पर काम क्यों नहीं करती? मैंने कहा कैसे ? उसने कहा एन.जी. ओ. बनाकर। सच कहती हूँ मुझे तब एन. जी. ओ.का अर्थ भी नहीं मालूम था । बस मेरी व्याकुलता और मेरे शुभचिंतको ने मुझे सुझाव दिए और चंद्रकला फाऊंडेशन” का निर्माण 2025 में हुआ ।
  •  चंद्रकला फाऊंडेशन के लक्ष्य एवं कार्य निम्नलिखित हैं:-
  •  नैतिक मूल्यों को उजागर करना एवं शोषण मुक्त समाज की स्थापना करना ।
  •  जातिवाद, धर्म एवं लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए शोध कायों व सेमिनार का आयोजन, शिक्षा केन्द्रों की व्यवस्था करना
  •  लोगों को उनके लोकतांत्रिक समाज में उनके मानव अधिकारएवं कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
  •  नारी सशक्तिकरण के तहत महिलाओं को जागरूक करना एवंअन्याय के विरूद्ध उने मन में हिम्मत आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मानकी भावना को उजागर करना, ताकि वह शोषण के विरूद्ध अपनीआवाज बुलन्द कर सके।
  •  लोगों में सामाजिक कुप्रथा जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह, सती प्रथा, घरेलू हिंसा एवं विधवा पुनर्विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करना।
  •  स्वास्थ्य कार्यक्रमों का आयोजन करना एवं एड़स,टी.बी. हैपीटाईटेस बी/सी, डेंगू, मलेरिया और कैंसर जैसी जानलेवा बिमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना।
  • कंबल और गर्म कपड़ों का वितरण एवं महिलाओं के लिए सिलाई मशीन की व्यवस्था करना साथ ही गरीब असहाय बच्चों के उत्थान के लिए कार्य किए।
  •  निर्धन परिवारों को कन्या के विवाह हेतु आर्थिक समाधान देना ।
  •  सामूहिक विवाहो के आयोजन के माध्यम से निर्धनों में मनोबल आत्मसम्मान में वृद्धि एवं उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार ।
  •  विवाह के अवसर पर होने वाली फिजूलखर्ची को रोककरसादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा देना।
  •  दहेज की रोकथाम तथा दहेज लोभियों को सजा प्रावधान करवाना।
  •  जन-हित के लिए गाँव-गाँव एवं शहरों में चिकित्सा शिविररक्त   दान शिविर, नेत्रदान शिविरों का आयोजन कराना।
  •  गरीबं घमखहाय लो के लिए अस्पताल, कलीनिक एवं चैरिटेबल डिस्पेंसरी खुलवाना, जिनमें गरीब एवं अपंग लोगों का इताज हो सके ।
  •  बालिका विकास एवं बालिकाओं के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक स्तर को बढ़ावा ।
  •  ग्रामीण लोगों में बालिका विकास के लिए जागरूकता लाना ।
  •  पिछड़े, निर्धन एवं अति गरीब परिवारों को कन्या-विवाह में आर्थिक सहयोग देना ।
  •  ग्रामीण क्षेत्र में लघु एवं कुटीर उद्योगों को विकसित एवं सहयोग के लिए उद्योग संस्था की स्थापना करना ।
  •   समाज के कमजोर एवं पिछड़े लोगों के उत्थान हेतु सामाजिक चेतना जाग्रत करना यथासंभव जरूरी आर्थिक सहायता उपलब्य कराना।
  •   समाज के शोषित एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों के पठन-पाठन तथा मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु प्रेरित करना।
  •   आर्थिक रूप से कमजोर एवं पिछड़े वर्ग के लोगों की लड़कियों के विवाह हेतु सहायता उपलब्ध कराना, गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों को सहायता उपलब्ध कराना ।
  •  समाज के हर वर्ग में उत्थान हेतु उचित मार्ग दर्शन एवं सहायता उपलब् कराना।
  •  पर्यावरण के संरक्षण हेतु सामाजिक चेतना जाग्रत करना तथा• उपयोगी खूंटी पाउ को रोकना, निकटता को बढ़ावा देना
     क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट निराकरण हेतु लोगों को जागरूक करना एवं जल प्रबंधन हेतु उचित उपाय करना।
     क्षेत्र के लोगों को शोषण एवं मानसिक, शारीरिक व आर्थिक पतन से बचाने के लिए उचित कार्यक्रम चलाना तथा उचित न्याय पाने हेतु सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना ।
     सबसे अहम् अशक्त, उपेक्षित तथा गरीब वर्ग की कन्याओं कोशारीरिक, एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाना ताकि वो अपने भविष्य को सुधार कर समाज में आत्मनिर्भर होकर सम्मान पूर्वक जीवन यापन कर सके।
  •  चंद्रकला फाऊंडेशन” ने प्रत्येक बालिका की रक्षा  को एक नारा दिया,जो आज “बेटियाँ फाऊंडेशन” के प्रतीक के रूप में घर-घर में पहचाना जाता है ।
    बेटियाँ से संसार सारा, बेटियाँ जीवन का आधार, बेटी है रौनक घर की, जिससे बनता है परिवार।।
  • “लाइट आफ नेशन” मासिक हिन्दी पत्रिका  के माध्यम से हमारा आप सभी से अनुरोध है कि आईएहमारे साथ कदम से कदम मिलाकर, बेटियों के संरक्षण, संवर्द्धन एवंउचित पोषण में पहल करें ताकि ये सुष्टि चिरजीवी हो अति सुन्दर होसके,जहाँ किसी भी बेटी को आत्महत्या न करनी पड़े,कोई दहेज की आग में न जले,कोई बेटी कोख में न मारी जाये और कोई भी बेटी ‘बलात्कार की शिकार न हो । 
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